मुझे कुछ ग़लतियों की कथा कहनी है स्वीकार करना है कुछ को कुछ को भूल जाना है और नट जाना है कुछ से तो साफ़ ही इस तरह करना है प्रवेश नए साल में कहते हैं परम्परा है कुछ ऐसी ही ***
अनुनाद का अनुषंग
मुझे कुछ ग़लतियों की कथा कहनी है स्वीकार करना है कुछ को कुछ को भूल जाना है और नट जाना है कुछ से तो साफ़ ही इस तरह करना है प्रवेश नए साल में कहते हैं परम्परा है कुछ ऐसी ही ***