दो कविताएँ नींद की गोली न जाने किस पदार्थ किस रसायन और किस विश्वास के साथ बनी है ये कि इसे खाने पर कुछ ही देर बाद सफ़ेद जलहीन बादलों की तरह झूटा दिलासा लिए तैरती आती है नींद लेकिन जारी रहता है दुनिया का सुनाई पड़ना आसपास होती हरक़तों का महसूस होना जारी रहता [...]
Archive for जनवरी 2010
“नींद की गोली” और एक खुफ़िया “एकालाप”
18/01/2010टामस ट्रांसट्रोमर (तोमास त्रांसत्रोमर)-शंघाई की सड़कें
10/01/20101950 के बाद से टामस ट्रांसट्रोमर (तोमास त्रांसत्रोमर) लगातार स्वीडिश कविता का सबसे महत्वपूर्ण चेहरा बने हुए हैं। आधुनिक स्वीडिश कविता का कोई भी जिक्र उनके बिना अधूरा होगा। नोबेल के इस देश में उनका नाम पिछले पांच दशकों से अधिक समय से न सिर्फ कवि-अनुवादक, बल्कि एक मनोविज्ञानी के रूप में भी एक स्थापित [...]
यरूशलम से समुद्र तक और वापसी – येहूदा आमीखाई
05/01/2010मेरा किया हुआ यह अनुवाद अशोक पांडे और उससे दोस्ती के उन विरल दिनों के लिए, जब उसने मुझे येहूदा आमीखाई जैसे कवि से परिचित कराया और उसे अनुवाद करने के लिए उकसाया। ऐसे दिनों का संस्मरण हमेशा बाक़ी रहता है। आमीखाई की इन कविताओं के बीहड़ में भटकना मुझे आज भी बहुत अच्छा लगता [...]
पहाड़
01/01/2010मैं जब भी उनके बारे में सोचता हूँ चले आते हैं एक के बाद एक छोटे-बड़े कई सारे पहाड़ और खड़े हो जाते हैं मेरी देह और आत्मा के अँधेरे सूंसाट में मेरे भीतर देर तक वे खड़े रहते हैं चुपचाप मैं उन्हें देखता हूँ और मेरी चढ़ाई चढ़ती सांसों के उत्तप्त वलय उनसे मिलते [...]