मैं जब भी उनके बारे में सोचता हूँ चले आते हैं एक के बाद एक छोटे-बड़े कई सारे पहाड़ और खड़े हो जाते हैं मेरी देह और आत्मा के अँधेरे सूंसाट में मेरे भीतर देर तक वे खड़े रहते हैं चुपचाप मैं उन्हें देखता हूँ और मेरी चढ़ाई चढ़ती सांसों के उत्तप्त वलय उनसे मिलते [...]