चौदह बरस पहले गुज़र गईं दादी मैं तब बीस का भी नहीं था दादी बहुत पढ़ी-लिखी थीं और सब लोग उनका लोहा मानते थे मोपांसा चेखव गोर्की तालस्ताय लू-शुन तक को पढ़ रखा था उन्होंने और हम तब तक बस ईदगाह और पंच-परमेश्वर ही जानते थे मैं और मां सुदूर उत्तर के पहाड़ों पर रहते [...]
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दादी की चिट्ठियाँ
25/02/2010रुलाई
02/02/2010मुझे नहीं पता मैं पहली बार कब रोया था हालांकि मुझे बताया गया कि पैदा होने के बाद भी मैं खुद नहीं रोया बल्कि नर्स द्वारा च्यूंटी काटकर रुलाया गया था ताकि भरपूर जा सके ऑक्सीजन पहली बार हवा का स्वाद चख रहे मेरे फेफड़ों तक मुझे अकसर लगता है कि मैं शायद पहली [...]