चौदह बरस पहले गुज़र गईं दादी मैं तब बीस का भी नहीं था दादी बहुत पढ़ी-लिखी थीं और सब लोग उनका लोहा मानते थे मोपांसा चेखव गोर्की तालस्ताय लू-शुन तक को पढ़ रखा था उन्होंने और हम तब तक बस ईदगाह और पंच-परमेश्वर ही जानते थे मैं और मां सुदूर उत्तर के पहाड़ों पर रहते [...]