Archive for फ़रवरी 25th, 2010

दादी की चिट्ठियाँ

25/02/2010

चौदह बरस पहले गुज़र गईं दादी मैं तब बीस का भी नहीं था दादी बहुत पढ़ी-लिखी थीं और सब लोग उनका लोहा मानते थे मोपांसा चेखव गोर्की तालस्ताय लू-शुन तक को पढ़ रखा था उन्होंने और हम तब तक बस ईदगाह और पंच-परमेश्वर ही जानते थे मैं और मां सुदूर उत्तर के पहाड़ों पर रहते [...]

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