Archive for the ‘पाती’ Category

देवताले जी को कुछ चिट्ठियाँ

23/12/2009

24.09.2005 हमारे बहुत प्यारे दादा जी,                                              हमारा बहुत-बहुत प्यार, जैसा कि तय था नए घर में आपकी चिट्ठी ही डाकिये को पहली बार मुझसे मिलाने लायी। आपके अक्षर अब भी मोती जैसे ही हैं। अब यह ज़रूरी तो नहीं कि मोती माला में व्यवस्थित ही रहें, वे बिखरे हुए भी सुन्दर लगते हैं। यहाँ [...]

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